Bihar And Orissa Public Demand Recovery Act 1914 Pdf In Hindi Extra Quality 〈VERIFIED — 2027〉
यदि आपको ऑनलाइन प्रति मिलने में कठिनाई हो रही है, तो किसी भी जिला अदालत या कलेक्ट्रेट परिसर के पास स्थित सरकारी बुक स्टॉल से इसकी हिंदी 'बेयर एक्ट' (पुस्तिका) खरीदी जा सकती है। निष्कर्ष
यह अधिनियम ब्रिटिश काल के दौरान वर्ष 1914 में लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी बकाया, कर, ऋण और अन्य सार्वजनिक राशियों (Public Demands) की वसूली को सरल, त्वरित और प्रभावी बनाना है। स्वतंत्रता के बाद भी बिहार और ओडिशा राज्यों में इस कानून को आवश्यक संशोधनों के साथ लागू रखा गया है।
भारत के राजस्व कानूनों के इतिहास में (Bihar and Orissa Public Demand Recovery Act, 1914) एक अत्यंत महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर अनदेखा किया जाने वाला कानून है। यह अधिनियम मुख्य रूप से बिहार और उड़ीसा (अब ओडिशा) राज्यों में सरकारी बकाया, भू-राजस्व, ऋण, और अन्य सार्वजनिक मांगों (Public Demands) को वसूलने के लिए बनाया गया था। आज भी, जब किसी व्यक्ति या संस्था पर सरकार का कोई बकाया होता है (जैसे भूमि कर, सिंचाई शुल्क, या को-ऑपरेटिव सोसाइटी का ऋण), तो इसी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है।
जब कोई राशि देय होती है और बकायेदार उसे चुकाने में विफल रहता है, तो संबंधित सरकारी विभाग का अधिकारी 'सर्टिफिकेट अधिकारी' (Certificate Officer) के पास एक मांग पत्र भेजता है। सर्टिफिकेट अधिकारी इस मांग से संतुष्ट होने पर एक औपचारिक सर्टिफिकेट तैयार करता है और उस पर हस्ताक्षर करता है।
राज्य (State) के विकल्प में 'Bihar' या 'Odisha' चुनें।
यदि आधिकारिक हिंदी अनुवाद उपलब्ध है, तो वहां आपको "Hindi" या "Regional Language" का विकल्प दिखेगा, जहां से आप PDF डाउनलोड कर सकते हैं।
जब किसी सरकारी या नामित निकाय को बकाया वसूलना होता है, तो वे सर्टिफिकेट ऑफिसर को लिखित मांग (Requisition) भेजते हैं।
यदि कोई व्यक्ति प्रमाण-पत्र अधिकारी के निर्णय से संतुष्ट नहीं है, तो कानून उसे उच्च अधिकारियों के समक्ष अपील करने का अधिकार देता है:
प्रमाणपत्र की राशि न चुकाने पर, अधिकारी निम्नलिखित तरीकों से वसूली कर सकता है:
इस अधिनियम के तहत हर प्रकार के कर्ज या बकाया को लोक मांग नहीं माना जाता है। अधिनियम की में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है कि किन बकायों को 'लोक मांग' माना जाएगा। इसके मुख्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:
इस धारा के तहत, सरकार एक अनुसूची (Schedule) जारी करती है जिसमें बताया जाता है कि कौन-कौन सी राशियाँ "सार्वजनिक मांग" की श्रेणी में आएंगी।
प्रमुख विशेषताएं और प्रावधान: Bihar and Orissa Public Demands Recovery Act, 1914
अधिनियम का मुख्य उद्देश्य
चल और अचल संपत्ति को जब्त कर बेचा जा सकता है।
बिहार और उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914
